Tuesday 25 December 2007

मोदी विजयी कांग्रेस-भाजपा सहित हिन्दू संगठन चारो खाने चित

नरेन्द्र मोदी ने गुजरात विधान सभा चुनाव में शानदार वापसी कर एक इतिहास रच दिया है। ये इतिहास इसलिये नहीं है कि भाजपा की पुन: एक बार फिर सत्ता में वापसी हुई है। इतिहास इसलिये है कि हिन्दुत्व की राजनीति में पहली बार एक व्यक्ति हिन्दू संगठनों पर भारी पड़ा। इस चुनाव में भाजपा के वरिष्ट नेता लाल कृष्ण आडवाणी को छोड़ कर किसी ने भी नरेन्द्र मोदी के पक्ष में चुनाव प्रचार नहीं किया। यहां तक भाजपा के सबसे बडे नेता अटल बिहारी वाजपेयी भी मौन रहे। जब समाचारो में यह बात आने लगी कि श्री वाजपेयी हिमाचल में भाजपा को जीताने की अपील कर रहे हैं लेकिन गुजरात में नहीं तब जाकर श्री वाजपेयी गुजरात विधान सभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले एक लाइन का यह मैसेज दिया कि भाजपा को वोट करें। वास्तव में नरेन्द्र मोदी ने लाल कृष्ण आडवाणी और अरुण जेटली को छोड कर अन्य किसी भी नेता को महत्व हीं नही दिया चाहे वे श्री वाजपेयी हों या भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह। इतना हीं नहीं विश्व हिन्दू परिषद और संघ का एक बडा धड़ा मोदी विरोधी रहा। गुजरात भाजपा के नेता तो मोदी के खिलाफ ही प्रचार कर रहे थे बावजूद मोदी ने अपने ही घर के राजनीतिक दुश्मनों के साथ कॉग्रेस को हरा दिया। ये शुद्ध रुप से मोदी की जीत है। अब भाजपा की मजबूरी है कि मोदी की जीत को भाजपा की जीत बताये। इतनी बडी जीत के बाद भी भाजपा नेताओं के चेहरे पर वो खुशी नहीं दिख रही है जो पहले दिखा करता था।
चुनाव परिणाम आने के बाद आकलन शुऱु हो गया कि आखिर क्या वजह है कि नरेन्द्र मोदी को शानदार सफलता मिली। इस पर आगे चर्चा करेंगे उससे पहले जो सवाल पैदा हो रहे थे कि नरेन्द्र मोदी जीत भी सकते और हार भी सकते है उसके कारण क्या थे – 1. भाजपा की एकता तार तार हो चुकी थी. गुजरात के प्रमुख भाजपा नेता पूर्व मुख्यमंत्री केशू भाई पटेल समेत दर्जनों नेता मोदी के खिलाफ प्रचार कर रहे थे। 2.आडवाणी को छोड़ भाजपा के सारे वरिष्ठ नेताओं को चुनाव प्रचार के मुख्य धारा से बाहर ऱखा गया।यहां तक कि अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता को भी महत्व नहीं दिया गया।.3. संघ और विश्व हिन्दू परिषद का मोदी के समर्थन करने के वजाय मौन रहना 4. गुजरात दंगे के लिये दुनियां भर में निंदा .5. इस बार कॉग्रेस और एनसीपी का मिलकर चुनाव लड़ना। 6.लगातार सत्ता में बने रहने से विरोध लहर की उम्मीद 7.चुनावी प्रचार के समय सीडी का जारी होना जिसमे गुजरात दंगे के लिये मोदी को साफ तौर पर दंगा संरक्षक दिखाया गया. आदि.

इतने के बावजूद नरेन्द्र मोदी चुनाव क्यों जीते? आम तौर पर यही कहा जाता है कि 1. नरेन्द्र मोदी ने राज्य में विकास का काम किया है और 2.चुनाव प्रचार में आक्रमक नीति अपनाई। विकास मुद्दा होता तो उनके आधा दर्जन मंत्री चुनाव नहीं हारते। सिर्फ इतने से कोई चुनाव नहीं जीत सकता । गुजरात दौरे पर गये पत्रकार, विभिन्न दलो के राजनीतिज्ञ और कुछ सामजिक लोगों से बातचीत करने के बाद जो निष्कर्ष निकाले गये उससे यही लगता है कि नरेन्द्र मोदी का जीतना तय था। जिसे लोग समझने में भूल कर बैठे। मोदी ने प्रचार के लिये ठेठ गवई , आक्रमक और लालू यादव की प्रचार शैली को अपनाया। मोदी जहां भी गये वे अपने भाषण के दौरान लोगों को अपने पक्ष में मतदान करने के लिये समझाते रहे नीतिगत भाषण के अलावा। जैसे – प्र. आप किसको जीतना चाहते हैं उ. आपको आपको ... मुझे जिताने के लिये सिर्फ नारे लगाने से काम नहीं चलेगा। आपको मन मजबूत कर बूथ पर जाना होगा थोडा़ कष्ट सहकर लाइन में लगकर वोट करना होगा। वोट अब इलेक्ट्रोनिक मशीन से होता है इसलिये सावधानी से देखना होगा और जहां कमल का निशान होगा वहां बटन दबायेंगे तभी आपका मोदी भाई मुख्यमंत्री बनेगा। ये सारी बाते नरेन्द्र मोदी गुजराती में अपने समर्थकों से अपील करते रहे। यह पहला मौका था कि जब वर्ण व्यवस्था के तहत समाज के कमजोर वर्ग के लोगों ने मोदी ( भाजपा को नहीं) को जबरदस्त वोट किया। सूरत के कौशल नारायण राणा जो पिछड़े वर्ग से है। इसका कहना है कि मैं पूरी तरह हिन्दू मुस्लिम दंगों के खिलाफ हूं। गुजरात में जो दंगे हुये मैं इसका बिल्कुल समर्थन नहीं करता। नरेन्द्र मोदी के खिलाफ मैंने भी काम किया। मैं कमल पर मुहर कभी नहीं लगा सकता था लेकिन जैसे ही मुझे मालूम चला कि नरेन्द्र मोदी के खिलाफ सारे लोग हैं चाहे अटल बिहारी वाजपेयी हों या राजनाथ सिंह या विश्व हिन्दू परिषद या संघ। वो भी इसलिये कि वे नहीं चाहते थे कि पिछड़े वर्ग का कोई नेता भाजपा के शीर्ष कमांड संभालने की स्थिति में हो। जैसा कल्याण सिंह के साथ श्री वाजपेयी ने किया। उन्होने श्री सिंह को न सिर्फ राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से रोका बल्कि ऐसी स्थिति पैदा कर दी थी कि उन्हे पार्टी से निकलने पर मजबूर कर दिया। इस लिये मैंने मोदी को वोट किया। मोदी की जीत में एक बड़ा कारण मोदी का पिछड़े वर्ग का होना भी माना जा रहा है। पिछड़े वर्ग ने मोदी के समर्थन में गोलबंद होकर वोट किया।बहरहाल मोदी ने भले हीं चुनाव जीत लिया हो लेकिन गुजरात में जो निर्दोंष लोगों की हत्या हुई उसके लिये मोदी ही जिम्मेवार हैं। सोहराबुद्दीन एनकांउटर को लेकर जो खेल नरेन्द्र मोदी ने खेला वह कतई उचित नहीं। सोहराबुद्दीन अपराधी था उसे पुलिस ने मार गिराया एक हद मान लिया जाये कि यह सही है लेकिन उसकी पत्नी का क्या कसूर था। गवाह प्रजापति का क्या कसुर था कि उन्हे क्यों मार गिराया गया?

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