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Tuesday, 6 January 2009

बेनजीर हत्या की जांच रुकवाया राष्ट्रपति जरदारी ने। आंतकवादियों को नहीं सौपेगा। जरदारी को राष्ट्रपति बनाने में आंतकवादियो की मुख्य भूमिका

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी आप कुछ भी कर ले पाकिस्तान एक ही रट लगायेगा कि मुंबई हमले मामले में पकड़ा गया आंतकवादी मोहम्मद अजमल कसाब पाकिस्तानी नहीं है। मुंबई हमले मे किसी भी सरकारी पाकिस्तानी ऐजेंसी का हाथ नहीं है। भारत में हो रहे आंतकवादी हमले में पाकिस्तान स्थित आंतकवादी गतिविधियों के बारे में पाकिस्तान की सरकार पहले भी नकारती रही है लेकिन इस बार हमारे पास पुख्ता सबूत होते हुए भी पाकिस्तान नकार रहा है।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी आप पाकिस्तान के वर्तमान राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से उम्मीद न करे कि वह आसानी से मान जायेगें कि मुंबई हमले में पाकिस्तान या पाकिस्तान स्थित किसी आंतकवादी संगठन का हाथ है। क्योंकि जो राष्ट्रपति जरदारी अपनी पत्नी बेनजीर भुट्टो की हत्या के मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया हो उससे आप क्या उम्मीद कर सकते हैं। बेनजीर की हत्या आंतकवादियो ने ही की। कहा जाता है कि राष्ट्रपति जरदारी और आंतवादियों के बीच जबरदस्त सांठगांठ है। इसे इस प्रकार कहे कि राष्ट्रपति जरदारी को पाकिस्तान की सत्ता तक पहुंचाने के लिये आंतकवादियों ने बेनजीर की हत्या को अंजाम दिया तो गलत नहीं होगा। बेनजीर की हत्या की जांच को आगे बढाने को लेकर पाकिस्तान में भी रैलियां निकाली जा रही है। यदि राष्ट्रपति जरदारी का हाथ अपनी पत्नी के हत्या में नहीं है तो आखिर क्या वजह है कि राष्ट्रपति जरदारी आंतकवादियों के खिलाफ कदम उठाने से डर रहे हैं? आखिर क्यों आंतकवादी संगठन तालिबान ने पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर भारत के खिलाफ युद्द लड़ने का ऐलान किया ?

क्या भारत को पाकिस्तान पर हमला करना चाहिये ? इसका एक लाईन में उत्तर है नहीं। इस पर दर्जनों सवाल उठ सकते हैं ? लेकिन मेरा मानना है कि दोनो देश परमाणु ताकत है। ऐसे में हमला करना उचित नहीं होगा क्योंकि आज की तिथि में हम जीत कर भी हार जायेंगे। परमाणु का डर नहीं है लेकिन यदि युद्व होता है तो भारत कुछ ही समय में पाकिस्तान को नेस्तनाबूद कर देगा। वह ऐसे युग में चला जायेगा जहां टेली विजन औ र रेडियो सपने लगते होंगे। लेकिन हमें भी भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। भारत 15 से 20 सालों के अंदर आर्थिक जगत में दुनिया का नेतृत्व करने वाला है वहीं युद्व होने पर हम कम से कम 30 साल पीछे छुट जायेंगे। जानमाल का नुकसान होगा सो अलग।

पाकिस्तानी आंतकवादियों हमले का हल क्या है ? आज की तारीख में इसका हल यही है कि भारत अपनी रक्षा पंक्ति मजबूत रखे, खुफिया सूचना के आधार पर देश के अंदर आंतकवादियों को मार गिराये और संयम से काम करे। युद्द अंतिम रास्ता है। भारत को संयम से ही काम करना चाहिये। क्योंकि पाकिस्तान खुद ही टूट की कगार पर है। पाकिस्तान में सत्ता के चार केंद्र हैं – (1) राष्ट्रपति (2) प्रधानमंत्री (3) सेना अध्यक्ष और (4) आईएसआई । इसमें भी पाकिस्तान का सेना अध्यक्ष काफी ताकतवर है। इसके इतिहास से पूरी दुनियां वाकिफ है। यहां सब लोग मजे में है लेकिन पाकिस्तान की जनता बेहाल है।

पाकिस्तान चार प्रांतो में बंटा हुआ है 1.बलूचिस्तान 2.नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस 3.पंजाब और 4. सिंध । इसके अलावा चार प्रशासनिक क्षेत्र हैं 5.इस्लामाबाद राजधानी क्षेत्र 6.संघीय प्रशासित ट्राईबल क्षेत्र 7. पाक अधिकृत कशमीर और 8.उत्तरी क्षेत्र। यानी कुल मिलाकर पाकिस्तान आठ भागों में है। इनमें से दो राज्य बलूचिस्तान और नॉर्थ फ्रंटियर प्रोविंस पाकिस्तान सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। और यह इलाका लगभग आधा पाकिस्तान है। आप पाकिस्तान के नक्शे को देख समझ सकते हैं। इन्हीं इलाके में तालिबानी आंतकवादियों का बोलबाला है।

बलूचिस्तान और नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस में अमेरिका के दबाव में पाकिस्तानी सेना और आंतकवादियों के बीच लगातार एक दूसरे पर हमले की खबर आती है जब अमेरिका को यह लगता है कि पाकिस्तानी सेना आंतकवादियों के खिलाफ कुछ नही कर रही है तो पाकिस्तान की इजाजत के बिना अमेरिकी जहाज पाकिस्तान में घुस कर बमबारी करते रहती है। यह एक आजाद मुल्क के लिये शर्म की बात है।

परवेज मुशरर्फ जब पाकिस्तान के सेना अध्यक्ष और राष्ट्रपति थे तब पाकिस्तान की सेना बलूचिस्तान और नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस में तालिबानी आंतकवादियों के खिलाफ तेज कारवाई हो रही थी लेकिन आज नहीं। यहां उल्लेखनीय है कि शासन किसी का भी हो लेकिन पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर इलाके में आंतकवादियों को वहां की सरकार हमेशा मदद करते रही है। आंतकवादियों के पास वे सारी सुविधायें जो पाकिस्तान की सेना के पास है।

ऐसा मालूम पड़ता है कि अमेरिकी सेना के हमले से बचने के लिये हीं पाकिस्तानी आंतकवादियों ने एक योजना बनाई जिसमें आसिफ अली जरदारी से साठगांठ किया गया और बेनजीर की हत्या कर दी गई । और भावनाओं के बल पर जरदारी राष्ट्रपति बन बैठे। यही कारण है कि राष्ट्रपति जरदारी आंतकवादियों के खिलाफ कदम नहीं उठा पा रहे हैं।

Wednesday, 24 December 2008

पाकिस्तान का परमाणु बम आंतकवादियों से दूर नहीं। राष्ट्रपति जरदारी आंतकवादियों के बीच का ही आदमी है। क्या जरदारी ने हीं अपनी पत्नी की हत्या करवायी ?

पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टों की हत्या में क्या उन्हीं के पति आसिफ अली जरदारी (वर्तमान राष्ट्रपति,पाकिस्तान) का हाथ है? पाकिस्तान के राष्ट्रपति जरदारी जिस प्रकार से आंतवादियों के समर्थन में, भारत के साथ युद्ध करने को भी तैयार हैं यह सब कुछ बेनजीर की हत्या की ओर भी इशारा करता हैं। कुछ कडियों को जोड़ने पर साफ मालूम पड़ता है कि बेनजीर की हत्या में उनके ही पति का हाथ हो सकता है। और इसमें आंतकवादी संगठन और आईएसआई का एक बड़ा नेटवर्क जुड़ा हुआ है।

1. हथियारो से लैस अपराधी बैनजीर के पास तक कैसे पहुंचा ?
2. बेनजीर की हत्या कैसे हुई इसको लेकर भ्रम क्यों फैलाया गया ? पहले रिपोर्ट आई कि गोली लगने से हत्या हुई। फिर कुछ समय बाद यह क्यो कहा गया कि बेनजीर की मौत गोली से नहीं हुई।
3.बेनजीर के पति आसिफ अली जरदारी ने बेनजीर की दुबारा पोस्टमार्टम क्यों नहीं होने दी? जिससे सच्चाई सामने आ जाती।
4. बेनजीर की मौत के बाद राजनीति में न आने की दुहाई देने वाले जरदारी राष्ट्रपति बन क्यों बन बैठे। अपने बेटे को सिर्फ मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया। यदि पहले ही कह देते कि वे राजनीति में आ रहे है तो आम जनता को धोखा नहीं होता।
5. जरदारी के राष्ट्रपति बनते हीं आंतकवादियों की गतिविधियां तेज हो गई। उन्हें सेना और आईएसआई से भरपूर सुरक्षा और मदद मिलने लगी।
6. मुंबई में हुए आंतकवादी हमले के बाद राष्ट्रपति जरदारी आंतवादियों के खिलाफ कार्रवाई करने की वजाय उन्हें बचाने पर क्यों जुटे? क्या उन्हें डर है कि आंतकवादियों के खिलाफ कार्रवाई किये तो आंतकवादी संगठन उसके पोल खोल देंगे।
7. मुंबई में पकड़े गये आंतकवादी कसाब के बारे में पाकिस्तानी मीडिया, पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ सभी कह रहे हैं कि वह पाकिस्तानी है लेकिन पाकिस्तानी सरकार साफ इंकार कर रही है।
8. मुंबई हमले के बाद आंतकवादी संगठन के कुछ बड़े प्रमुख को पकडने के बाद क्यों कहा कि वह पाकिस्तान में नहीं है।
7. लश्करे- तैय्यबा सहित सभी आंतकवादी संगठन ने जरदारी को क्यों समर्थन दिया कि यदि भारत के खिलाफ जंग होता है तो उसके एक लाख ट्रैंड लोग पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर लड़ेगी।

पहले से ही कहा जा रहा है कि पाकिस्तान दुनियां के लिये गंभीर खतरा बनने जा रहा है। अब यह दिखने भी लगा है। पाकिस्तान को आंतकवादियों की राजधानी कहा जाये तो गलत नही होगा। आसिफ जरदारी का राष्ट्रपति बनना यह संकेत करता है कि आंतकवादियों के बीच का ही कोई आदमी राष्ट्रपति बन बैठा है। यानी पाकिस्तान का परमाणु बम आंतकवादियों से दूर नहीं है। ऐसे में आंतकवादी कोई बहुत बड़ी घटना को भी अंजाम दे सकते हैं। आंतकवादी कोई बड़ा हमला करे इससे पहले ही ठोस कार्रवाई कर देनी चाहिये। चाहे पाकिस्तान पर हमला ही क्यों न करना पड़े। यदि आप हमला नहीं करते हैं और कल फिर यही घटना दुहराई जाती है तो फिर क्या करेंगे ?

Monday, 7 July 2008

भारतीय दूतावास पर आत्मघाती हमला 41 की मौत

आंतकवादियों की गतिविधियां लगातार बढती जा रही है। कल पाकिस्तान के लाल मस्जिद में हुए आंतकवादी हमले के बाद आज अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल स्थित भारतीय दूतावास पर आत्मघाती हमले में भारतीय सेना के एक ब्रिगेडियर आर डी मेहता समेत 41 लोगों की मौत हो गई। और 50 से अधिक लोग घायल हुए।

आंतकवादियों के आत्मघाती दस्ते ने विस्फोटकों से भरी हुई कार को भारतीय दूतावास के गेट से सीधे टकरा दिया। यह घटना उस समय घटी जब लोग दूतावास में वीज़ा आवेदन देने के लिए लाइन में लगे थे। मरने वालों की संख्यां में बढोतरी भी हो सकती है। इसमें ब्रिगेडियर मेहता के अलावा और भारतीय थे या नहीं इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है।

भारत सरकार ने इस घटना की निंदा की है और कहा है कि इस प्रकार के हमले से आंतकी भारत को अपनी जिम्मेवारी निभाने से नहीं रोक पायेगें। उल्लेखनीय है कि भारत और अफगानिस्तान के बीच ऐतिहासिक और मधुर रिश्ते रहे हैं।

Sunday, 6 July 2008

लाल मस्जिद के पास धमाका 10 की मौत

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद स्थित लाल मस्जिद के पास एक पुलिस चौकी में हुए धमाके में 10 लोगों की मौत हो गई। इनमें नौ पुलिस वाले शामिल हैं। कहा जाता है कि लाल मस्जिद में पिछले साल सेना की कार्रवाई का एक साल पूरा होने के मौके पर धमाका किया गया। इस घटना की सभी लोगों ने निंदा की।
भारत को तबाह करने की मकसद से तैयार किये गये आंतकवादियों से आज पाकिस्तान खुद परेशान है। कहा जा रहा है कि भारत को तबाह करने के लिये पाकिस्तान ने बड़े पैमाने पर आंतकवादी तैयार किये। उनलोगों को पाक सरकार ने सेना के कैंप में ट्रैनिंग दिलवाई। भारत में आज भी जगह जगह विस्फोट हो रहे हैं। लेकिन इससे पाकिस्तान खुद भी नहीं बच पाया है। पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर मारी गई। आज फिर विस्फोट हो गया।

पाकिस्तान ने जो भारत के लिये जहर का बीज बोया है उससे निपटने के लिये भारत ने तैयारी कर रखी है। हां यह जरूर है कि कहीं कहीं विस्फोट हो जाता है लेकिन पाकिस्तान का क्या होगा? कहा जा रहा है कि पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर आंतकवादियों का कब्जा हो सकता है। इसके अलावा पाकिस्तान के पश्चिमी हिस्सें में खुद पाकिस्तान सरकार की पकड़ नहीं हैं वहां आंतकवादियों ने कब्जा कर रखा है। वहां पर उन्हीं का कानून चलता है। और इसी नाम पर अफगानिस्तान में जमे अमेरिकी सैनिक पाक सीमा में घुस कर हमला करता रहता है। एक देश के लिये इससे अधिक अपमान की बात और क्या हो सकती है। अभी भी समय है यदि पाकिस्तान नहीं संभला तो वो दिन दूर नहीं जब आंतकवादी खुद पाकिस्तान को निगल जायेंगे और वहां अमेरिकी हुकूमत का शासन होगा।

Friday, 19 October 2007

अपने हीं आंतकवाद की चपेट में फंसा पाकिस्तान, धमाके में 130 से अधिक की मौत

पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के काफ़िले पर हुए आत्मघाती हमले में 130 से अधिक लोगों की मौत हो गई और 600 से अधिक लोग घायल हैं ।इस घटना की भारत समेत विश्व के सभी देशों ने निंदा की। लगातार कड़ी आलोचना हो रही है। सभी भारतवासी इस घटना से दुखी हैं। भारत सरकार ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। यह हमला गुरुवार की रात 12 बजे के बाद हुई।इस हमले में बेनज़ीर भुट्टो बच गईं । बेनजीर 8 साल बाद पाकिस्तान लौटी. हमले के बाद किसने क्या कहा यह जान ले और फिर यह जानेगें कि आप यदि पड़ौसी का घर जलाओगे तो आपके घर में अपने आप हीं आग लग जायेगी।
परवेज मुशर्रफ(राष्ट्रपति पाकिस्तान) – लोकतंत्र के खिलाफ साजिश, दोषियों को छोड़ा नहीं जायेगा।
आसिफ ज़रदारी(बेनज़ीर के पति) – इस विस्फोट के लिये सरकार में शामिल कुछ लोग जिम्मेदार हैं। इसके पीछे लोकतंत्र के दुश्मन नहीं चाहते की लोकतंत्र बहाल हो।
बान की मून(संयुक्त राष्ट्र के महासचिव) – घटना की निंदा की और मृतक परिवारजनों के प्रति संवेदना प्रकट की।
अमेरिका – यह एक आंतकवादी हमला है लोकतंत्र को रोका नहीं जा सकता।
चीन – पाकिस्तान में स्थिरता की जरुरत है।
ब्रिटेन -पाकिस्तान में शांति और लोकतंत्र की बहाली के लिए जो काम करना चाहते हैं. उन सभी लोगों के साथ ब्रिटेन मिलकर काम करेगी।इनके अलावा विश्व के कई और देशों ने बेनजीर पर हुये हमले की निंदा की।
बहरहाल, पाकिस्तान पिछले 20 सालों से भारत और अफगानिस्तान के खिलाफ लगातार काम करता आ रहा है। भारत में जगह जगह विस्फोट करवा कर लोगों की जान लेने वाले आंतकियों को पाकिस्तान ने ही तैयार किया। एक दो नहीं दर्जनों कैंप बनवाये पाकिस्तान के अलग अलग स्थानों पर जहां आंतकियों को प्रशिक्षण दिया गया। इतना हीं नहीं पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में भी तालीबान को बढावा देकर वहां भारी तबाही मचवायी। पड़ौस में आग लगाने के बाद अब पाकिस्तान खुद परेशान है। पश्चिम इलाके में पाकिस्तानी सैनिको पर भी वहां के आंतकी भारी पड़ रहे हैं। समय समय पर यह खबर आती है कि 10 सैनिक मारे गये तो कभी 50 मारे गये। अब तो पाकिस्तान के शहरी इलामें भी सिलसिलेवार हमले होने लगे हैं। वहां न ते आवाम सुरक्षित है और न हीं नेता। जैसा बोओगे वैसा ही काटोगे। बहरहाल हम यही चाहते हैं कि पाकिस्तान में शांति बहाल हो। दुनियां के सारे मुल्क में शांति हो लेकिन पाकिस्तान और अमेरिका की सरकार ऐसा होने देगी ?

Thursday, 20 September 2007

ओसामा ने धमकी दी मुशर्रफ को

एक कहावत है कि यदि कोई किसी के लिये गढा खोदता है तो प्रकृति उसके लिये खाई का इंतजाम कर देती है। यह कहावत पाकिस्तान के लिये सटीक है। आंतकवाद को संरक्षण देने वाला देश पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के खिलाफ अलकायदा ने युद्ध का ऐलान किया है। पाकिस्तान हमेशा नकारात्मक कामों को बढवा देता रहा खास कर भारत के खिलाफ। भारत के खिलाफ पाकिस्तान ने आंतकवादियों को इतना अधिक मदद किया और कर रहा है कि भारत में आये दिन बम धमाके हो जाते हैं। दुनियां में पाकिस्तान को आंतकवादियों की राजधानी कहा जाने लगा। लेकिन आज पाकिस्तान दोराहे पर है। कहा जाने लगा है कि पाकिस्तान एक और विभाजन की और बढ रहा है। इसका संकेत खुद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्र नवाज शरीफ दे चुके है। उन्होंने यह भी कहा है कि सेना से टकराव भी संभव है। उधर आंतकवादी संगठन अलकाय़दा ने भी पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को धमकी दी है। यानि राष्ट्रपति मुशर्रफ पाकिस्तान के नेताओं के साथ साथ आंतकवादियों के निशाने पर भी हैं। वहीं मुशर्रफ को अमेरिका का समर्थन प्राप्त है। अमेरिका चाहता है कि जब तक ईरान का मामला निपट न जाये तब तक परवेज मुशर्रफ का राष्ट्रपति बने रहना बेहद जरुरी है। और साथ हीं अलकायदा से जुड़े आंतकवादियों का सफाया करते रहें। लाल मस्जिद में सैन्य कार्रवाई मामले में, अमेरिका ने मुशर्रफ की तारीफ की थी, वहीं अलकायदा ने धमकी दी।
आंतकवाद को बढावा देने वाला देश पाकिस्तान आज खुद आंतकवाद के चंगुल में है। मुशर्रफ - यदि अमेरिका का साथ देता रहा तो अलकायदा पाकिस्तान में तबाही मचाता रहेगा, ब्लुचिस्तान और पंजाब इलाके में औसामा बिन लादेन जनरल मुशर्रफ से अधिक लोकप्रिय है। और यदि अमेरिका का साथ छोड़ता है तो मुशर्रफ कितने दिनों तक अपने पद पर बने रहेंगै कहा नहीं जा सकता। ऐसे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश इफ्तकार चौधरी प्रकरण और लाल मस्जिद के मामले ने पाकिस्तान को दो भागों में बांट दिया है।