कॉन्ट्रेक्ट किलर ब्रजेश सिंह आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ ही गया। उसे 24 जनवरी को उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर से गिरफ्तार किया गया। बताया जाता है कि उत्तर प्रदेश, झारखंड, दिल्ली और मुंबई पुलिस से बचने के लिये उसने सिंगापुर को अपना ठिकाना बनाया और दो महीने पहले हीं वह सिंगापुर से भुवनेश्वर पहुंचा। जब ब्रजेश भुवनेश्वर के बड़ा बाजार में चहल कदमी कर रहा था तभी दिल्ली पुलिस और उड़ीसा के पुलिस ने ब्रजेश को अपने कब्जे में ले लिया। उस समय पुलिस को काफी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा क्योंकि पुलिस वाले सिविल कपड़े में थे इसलिये लोगों को लगा कि ब्रजेश का कुछ लोग अपहरण कर रहे हैं। बाद में सच्चाई जानने के बाद लोग शांत हो गये। हुलिया बदलने में माहिर ब्रजेश के भुवनेश्वर में रहने से यही कयास लगाया जा रहा है कि इस बार किसकी हत्या होने वाली थी।
उसके गिरफ्तारी से अपराध जगत और राजनीति की दुनिया में खलबली मची हुई है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी का रहने वाला ब्रजेश सिंह के खिलाफ दर्जनों मामले दर्ज हैं जिनमें हत्या, अपहरण जैसे भी मामले हैं। ब्रजेश 1985 में अपने पिता के हत्यारे की हत्या करने के बाद जुर्म की दुनिया में पहला कदम रखा फिर मुड़ कर कभी नहीं देखा। 22 सालों बाद पुलिस के कब्जे में आया ब्रजेश सिंह कभी भी माफिया सरगना नहीं बन सका लेकिन वह अपराध जगत में एक खूंखार कॉन्ट्रेक्ट किलर के रुप में जाना जाता रहा। अपराध जगत में हमेशा चर्चित रहने वाला ब्रजेश कभी भी किसी का विश्वसनीय नहीं रहा और न हीं कभी भी किसी पर विश्वास किया चाहे उसे कोई लाखों रुपये का फाइनेंस ही क्यों न करता रहा हो।
उत्तर प्रदेश में वह कभी वहां के बाहुबली हरि शंकर तिवारी से जुड़ा तो कभी मुख्तार अंसारी से तो कभी अतीक अहमद से। पिता के हत्यारे की हत्या करने के बाद भी लोग उसे अपराधी नहीं मानते थे लेकिन ब्रजेश अपराध जगत की ओर बढ चुका था। उसका नाम 1992 में जोरदार तरीके से अपराध जगत में सामने आया। जब उसने अंडर वर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के खास आदमी सुभाष ठाकुर के साथ मिलकर मुंबई के जे जे हॉस्पीटल में गोलीबारी की जिसमें शैलेष हलदनकर, सिपाही के पी भनावत और सी जे जेवसन की मौत हो गई। दरअसल शैलेष और विपिन सेरे ने दाउद इब्राहिम के बहनोई इब्राहिम पारकर की हत्या कर दी थी ये लोग गिरफ्तार होने के बाद हॉस्पीटल में भर्ती था जहां दाउद के इशारे के बाद बदला लिया गया। इस हत्याकांड के बाद ब्रजेश का नाम दाउद इब्राहिम के साथ जुड़ गया।
ब्रजेश अपनी आमदनी के लिये कोयले और लोहे के धंधे में पैर जमाने का फैसला किया लेकिन इसके लिये उसे उत्तर प्रदेश का कोयला मंडी और धनबाद के कोयला पर पकड़ होनी जरुरी थी लेकिन ब्रजेश के लिये यह काम आसान नहीं था क्योंकि धनबाद जिले में एक से बढकर एक कोयला माफिया है जिनसे मुकाबला करना ब्रजेश के बूते की बात नहीं थी इस लिय़े ब्रजेश ने सुपाड़ी लेकर हत्या करने का फैसला किया। इस खेल में उसने उत्तर प्रदेश के बाहुबलियों पर भी गोली बारी की लेकिन उसने धनबाद जिले में कोयला के खेल में शकल देव सिंह, विनोद सिंह, संजय सिंह को मौत की नींद सुला दी । मारे गये लोग कोयला जगत के बाहुबली थे। बताया जाता है कि इन हत्याओं का कॉन्ट्रेक्ट करोड़ो का था। आरजेडी नेता राजू यादव की हत्या में भी ब्रजेश का हीं नाम सामने आया।
बहरहाल गिफ्तारी के बाद बाहुबलियों में हड़कम मचा हुआ है। उससे जुड़े हर नेता को डर सता रहा कि पता नहीं कहीं बर्जेश सिंह ने उसका नाम ले लिया तो क्या होगा? लोग यही कहते हैं कि भाजपा के टिकट पर अपने भाई चुलबुल सिंह को विधान परिषद सदस्य बनवाने में भी ब्रजेश का ही हाथ था।
उसके गिरफ्तारी से अपराध जगत और राजनीति की दुनिया में खलबली मची हुई है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी का रहने वाला ब्रजेश सिंह के खिलाफ दर्जनों मामले दर्ज हैं जिनमें हत्या, अपहरण जैसे भी मामले हैं। ब्रजेश 1985 में अपने पिता के हत्यारे की हत्या करने के बाद जुर्म की दुनिया में पहला कदम रखा फिर मुड़ कर कभी नहीं देखा। 22 सालों बाद पुलिस के कब्जे में आया ब्रजेश सिंह कभी भी माफिया सरगना नहीं बन सका लेकिन वह अपराध जगत में एक खूंखार कॉन्ट्रेक्ट किलर के रुप में जाना जाता रहा। अपराध जगत में हमेशा चर्चित रहने वाला ब्रजेश कभी भी किसी का विश्वसनीय नहीं रहा और न हीं कभी भी किसी पर विश्वास किया चाहे उसे कोई लाखों रुपये का फाइनेंस ही क्यों न करता रहा हो।
उत्तर प्रदेश में वह कभी वहां के बाहुबली हरि शंकर तिवारी से जुड़ा तो कभी मुख्तार अंसारी से तो कभी अतीक अहमद से। पिता के हत्यारे की हत्या करने के बाद भी लोग उसे अपराधी नहीं मानते थे लेकिन ब्रजेश अपराध जगत की ओर बढ चुका था। उसका नाम 1992 में जोरदार तरीके से अपराध जगत में सामने आया। जब उसने अंडर वर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के खास आदमी सुभाष ठाकुर के साथ मिलकर मुंबई के जे जे हॉस्पीटल में गोलीबारी की जिसमें शैलेष हलदनकर, सिपाही के पी भनावत और सी जे जेवसन की मौत हो गई। दरअसल शैलेष और विपिन सेरे ने दाउद इब्राहिम के बहनोई इब्राहिम पारकर की हत्या कर दी थी ये लोग गिरफ्तार होने के बाद हॉस्पीटल में भर्ती था जहां दाउद के इशारे के बाद बदला लिया गया। इस हत्याकांड के बाद ब्रजेश का नाम दाउद इब्राहिम के साथ जुड़ गया।
ब्रजेश अपनी आमदनी के लिये कोयले और लोहे के धंधे में पैर जमाने का फैसला किया लेकिन इसके लिये उसे उत्तर प्रदेश का कोयला मंडी और धनबाद के कोयला पर पकड़ होनी जरुरी थी लेकिन ब्रजेश के लिये यह काम आसान नहीं था क्योंकि धनबाद जिले में एक से बढकर एक कोयला माफिया है जिनसे मुकाबला करना ब्रजेश के बूते की बात नहीं थी इस लिय़े ब्रजेश ने सुपाड़ी लेकर हत्या करने का फैसला किया। इस खेल में उसने उत्तर प्रदेश के बाहुबलियों पर भी गोली बारी की लेकिन उसने धनबाद जिले में कोयला के खेल में शकल देव सिंह, विनोद सिंह, संजय सिंह को मौत की नींद सुला दी । मारे गये लोग कोयला जगत के बाहुबली थे। बताया जाता है कि इन हत्याओं का कॉन्ट्रेक्ट करोड़ो का था। आरजेडी नेता राजू यादव की हत्या में भी ब्रजेश का हीं नाम सामने आया।
बहरहाल गिफ्तारी के बाद बाहुबलियों में हड़कम मचा हुआ है। उससे जुड़े हर नेता को डर सता रहा कि पता नहीं कहीं बर्जेश सिंह ने उसका नाम ले लिया तो क्या होगा? लोग यही कहते हैं कि भाजपा के टिकट पर अपने भाई चुलबुल सिंह को विधान परिषद सदस्य बनवाने में भी ब्रजेश का ही हाथ था।
