Sunday 30 March 2008

गुजरातियों को मुंबई छोड़कर जाने की धमकी

यदि गुजराती लोग मराठियों का सम्मान नहीं कर सकते हैं तो मुंबई छोड़कर चले जायें। यह बयान दिया है एनसीपी की प्रवक्ता और नगर सेविक विद्या चौहान ने। विद्या चौहान ने कहा कि मराठी लोगों के साथ गुजराती लोग अच्छा व्यवहार नहीं करते। मराठी महिलाओं को नौकरानी कहा जाता है। उनके लिये सम्मानजनक शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाता। विद्या चौहान के बयान बाजी पर कोर्ट ने रोक लगा दिया है. जब यह विवाद बढा तो विद्या चौहान ने कहा कि उन्होने ऐसा कहा हीं नहीं है। उनका कहने का यह आशय था कि जो गुजराती गुंडे हैं और मराठी महिलाओं के साथ रेप करने की बात करता है। उन्हें परेशान करता है उनके लिये कहा है।
बहरहाल मुंबई समेत महाराष्ट्र में मराठीवाद को लेकर बयानबाजी किसी न किसी रुप में जारी है। गुजराती समुदाय को मुंबई छो़ड़ कर जाने की हिदायत देने से पहले उत्तर भारतीयों के साथ भी ऐसा हीं हुआ था। मनसे नेता राज ठाकरे और शिव सेना उत्तर भारतीयों के खिलाफ राग अलापते रहते हैं। होली के दिन भूमिपुत्र के नाम पर स्थानीय लोगों ने जैन महिलाओं पर गुब्बारे फेके। विरोध करने पर उनके बिल्डिंग में घुस कर उनके साथ मारपीट की गई। पथराव किए गये । जैन मंदिर को नुकसान पहुंचाया गया। बाद में जैन समुदाय के लोगों ने रैली निकाली और पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की तब जाकर मामला ठंडा हुआ।
पता नहीं अपने हीं देश में परप्रांतियों का मामला कब तक चलेगा। लोग सवाल उठाने लगे हैं कि यही हाल रहा तो उत्तर-पूर्व राज्यों, जम्मू कश्मीर के आंतकवादी संगठनों और महाराष्ट्र के वे संगठन जो हिंसा का माहौल तैयार कर रहें उनमें क्या फर्क रह जायेगा।

Tuesday 25 March 2008

एसीपी राजबीर की हत्या अंडरवर्ल्ड ने की

अंडरवर्ल्ड ने दिल्ली के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस राजबीर सिंह की गोली मार कर हत्या दी। अंडरवर्ल्ड के उभरते डॉन बंटी पांडे ने दावा किया है कि उसी के गिरोह ने राजबीर की हत्या की है। इसका खुलासा खुद बंटी पांडे ने किया है। उसने एक टीवी चैनल को फोन कर बताया कि हत्या उसी ने करवाया है। जिस विजय भारद्वाज को पुलिस ने गिरफ्तार किया है उसने गोली नहीं मारी है। बंटी पांडे ने स्वीकार किया है कि विजय से उसकी दोस्ती थी और वह उसका प्रोपर्टी का काम भी देखता था लेकिन राजबीर ने पैसे को लेकर विजय को इतना जलील किया कि वह आत्महत्या करने वाला था। इसके बाद हीं राजबीर की हत्या की योजना बनाई गई।
इससे पहले की कहानी निम्नलिखित प्रकार से थी।पुलिस के अनुसार योजना के तहत आरोपी विजय ने पैसे के लेन-देन के मामले में एनकाउंटर विशेषज्ञ राजबीर को मिलने के लिए बुलाया । राजबीर पैसों के लिए विजय पर दबाव बना रहा था। मुलाकात के दौरान विजय ने अपने ड्राइवर व नौकर को बाहर भेज दिया था।पुलिस ने कहा कि विजय ने बयान में कहा है कि उसने तीन दिन पहले राजबीर से ही एक प्राइवेट रिवॉल्वर ली थी। इसी 32 बोर की रिवॉल्वर से विजय ने राजबीर पर दो गोलियां चलाई हैं। पुलिस के मुताबिक विजय ने पहली गोली पीछे से चलाई और दूसरी गोली बगल से हालांकि ऐसी भी खबरें हैं कि एक गोली राजबीर के माथे पर भी लगी है।
बहरहाल घटना को देख यही लगता है कि एसीपी राजबीर के पुलिस कर्तव्य के अलावा और भी उल्टे सीधे धंधे थे जिसका शिकार वे हो गये। राजबीर को जेड प्लस की सुरक्षा मिली हुई है। ऐसे में सवाल उठात है कि राजबीर दिल्ली से गुड़गांव बिना सुरक्षा के क्यों गया। राजबीर की हत्या तो हुई हीं साथ ही दिल्ली पुलिस की साख भी दाव पर लग गई।

Sunday 23 March 2008

जैन महिलाओं पर पत्थराव मुंबई में

मराठी मानुष के नाम पर मुंबई में मराठी गुंडो की गुंडागर्दी जारी है। मुंबई के भायखला इलाके में जैन समुदाय की महिलाओं ने अपने उपर फेंके जा रहे गुब्बारे का विरोध किया तो पास के हीं दूसरे बिल्डिंग में रहने वाले जिसमें मराठी अधिक हैं उन्हें महिलाओं का विरोध करना बूरा लगा और वे लोग जैन महिलाओं पर पत्थर फैंकने लगे। सरस्वती मंदिर के शीशे भी तोड़ दिये। जिस बिल्डिंग में जैन समुदाय के लोग रहते हैं उन्हें डराया धमकाया जाने लगा। लिफ्ट तक को तोड़ दिया गया। देखते हीं देखते बात बढ गई। दोनो हीं ओर से लोग जमा होने लगे। पुलिस भी पहुंच गई। पुलिस ने लाठी चार्ज किया जिसमें जैन समुदाय के कई महिलायें और बच्चे भी घायल हो गया। इस मामले में कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया और कुछ को हिरासत में लेकर छोड़ दिया गया। जैन समुदाय के लोगों का कहना है पुलिस गुंडे बदमाश को पकड़ने के वजाय हमी लोगों को परेशान कर रही थी.
होली के दिन हीं एक अन्य घटना में मराठी मानुष के नाम पर कुछ गुंडों ने उत्तर भारत को लोगों पर हमला किया। उनके साथ मारपीट की गई। इससे पहले जो हंगामें हो चुके हैं वो किसी से छिपा नहीं है। यदि यही आलम रहा तो वह दिन दूर नही जब देश के दुश्मन के ये लोग मोहरे होंगें और मराठी के नाम पर एक अलग देश बनाने की मांग करने लगेगें।

Thursday 20 March 2008

पत्रकार शिवानी की हत्यारे को सजा सोमवार को

शिवानी हत्याकांड को लेकर देश में बवंडर मच गया था क्योंकि इस हत्या में सीधे तौर पर एक आईपीएस आधिकारी रविकांत शर्मा का नाम उछला। इतना ही नहीं उस समय और तहलका मचा जब भाजपा के एक बड़े नेता जो अब दिवंगत हो चुके हैं उनका नाम भी सामने आया। ये आरोप रविकांत शर्मा की पत्नी ने दिवंगत भाजपा नेता का नाम लेकर कहा था कि शिवानी की हत्या में उनके पति को फंसाया जा रहा है जबकि हत्या का मुख्य आरोपी को बचाया जा रहा है क्योंकि केन्द्र में उनकी सरकार है। शिवानी की कई लोगों से मधुर संबंध थे उन्हीं में एक शर्मा जी भी थे। कहा जाता है कि प्यार के चक्कर में ये अधिकारी कुछ ऐसे दस्तावेज शिवानी को सौंप दिये जो उनके करियर को तबाह करता। उस दस्तावेज के आधार पर शिवानी उसे अपने साथ शादी करने के लिये दबाव बनाती रही और परेशान होकर शर्माजी ने उसकी हत्या करा दी।

बहरहाल इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार शिवानी भटनागर हत्याकांड ,में अदालत द्वारा कसूरवार ठहराए गए चार आरोपियों को सजा अब होली के बाद सोमवार को सुनाया जायेगा। दिल्ली की कडक़ड़डुमा कोर्ट ने 18 मार्च को मामले के मुख्य आरोपी रविकांत शर्मा (प्रधानमंत्री कार्यालय में ओएसडी रह चुके हरियाणा कैडर के आईपीएस अफसर) प्रदीप शर्मा , श्रीभगवान और सत्यप्रकाश को दोषी ठहराया। शिवानी भटनागर की 23 जनवरी 1999 को पटपड़गंज के नवकुंज अपार्टमेंट स्थित उनके फ्लैट में हत्या कर दी गई थी। जिस वक्त उनकी हत्या हुई वह घर पर अकेली थीं।

एक नजर घटनाक्रम पर - 30 जुलाई 2002: अभियुक्त श्रीभगवान गिरफ्तार , 2 अगस्त: प्रदीप शर्मा, 17 अगस्त: सत्यप्रकाश गिरफ्तार और 30 सितंबर: वेदप्रकाश गिरफ्तार । 27 अगस्त: आईपीएस अफसर रविकांत शर्मा का हरियाणा के अंबाला कोर्ट में सरेंडर, पुलिस उसे लेकर दिल्ली पहुंची । 28 सितंबर: क्राइम ब्रांच ने शर्मा को औपचारिक तौर पर गिरफ्तार किया । 25 अक्टूबर 2002: चार्जशीट दाखिल । 3 मार्च 2003: सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय, 20 मार्च 2003: पहला गवाह के बयान दर्ज और 23 अगस्त 2006: आखिरी गवाह के बयान दर्ज हुये। अगस्त 2007 में सरकारी पक्ष की बहस और नवंबर 2007 में बचाव पक्ष की बहस शुरू । 4 - 5 मार्च 2008: सरकारी पक्ष ने सफाई पेश की । 18 मार्च - मुख्य आरोपी सस्पेंड आईपीएस अफसर रविकांत शर्मा , प्रदीप शर्मा , श्रीभगवान और सत्यप्रकाश को दोषी ठहराया गया।
आईपीएस अधिकारी के वकील कह चुके हैं कि वे जिला अदालत के फेसले के खिलाफ हाई कोर्ट जायेंगे।

Tuesday 18 March 2008

यदि मौत को गले लगाना नहीं चाहते हैं तो कृपया ध्यान दें।

मुझे एक SMS मिला – “ Don’t eat Mentos before or after drinking Coke or Pepsi …..Because person will die for the reason that it creates cyanide.
पेप्सी, कोक , स्प्राईट या कोई भी अन्य कोल्ड ड्रीक्स पीने से पहले और बाद में मेन्टोस खाने से क्या आदमी मर सकता है? विचार करने परे जो तथ्य सामने आया वो इस प्रकार है - पेप्सी या कोक जैसे पेय पदार्थ में कार्बन डाइऑक्साईड होता है और मेन्टोस जैसी माउथ फ्रेशनर खाने की चीजों में अनेक रसायन होते हैं उनमें से एक है नाइट्रोजन। साइनाइड को खतरनाक जहरीला बनाने में कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन दोनो का हीं बड़ा योगदान होता है। इसलिये हो सकता है कि कोल्ड ड्रीक्स के पीने से पहले या बाद में, मेन्टोंस खाने से, कार्बन डाइऑक्साइड और नाईट्रोजन के रासायनिक प्रक्रिया से जहरीली मात्रा अधिक हो जाये और आदमी की मौत हो जाये । यह सिर्फ दोस्तों के नाते सलाह और जानकारी के लिये लिखा रहा हूं। और आगे की जानकारी के लिये थोड़ी छानबीन करनी होगी।

धन्यवाद।

Monday 3 March 2008

सावधान रहिये नहीं तो शर्मिन्दिंगी उठानी पड़ेगी

इंसान को हमेशा सावधान रहना चाहिये छोटी से छोटी बातों के लिये भी अन्यथा शर्मिंदा होना पड़ सकता है कभी भी। ऐसा हीं हुआ है महाराष्ट्र के डीजीपी पी एस पसरीचा के विदाई समारोह के दौरान। बाकी खुलासा तस्वीरें खुद कर देती हैं। ऐसा किसी के भी साथ हो सकता है। सावधान रहिये।