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Tuesday, 30 September 2008

महिला टीवी पत्रकार की गोली मार कर हत्या

महिला प्रड्यूसर सौम्या विश्वनाथन की गोली मार कर हत्या कर दी गई। दिल्ली के पॉश इलाके वंसत कुंज के पास गोली मारकर हत्या की गई। वह ड्यूटी पूरी होने के बाद देर रात घर लौट रही थीं। हत्यारे ने सौम्या की कार के टायर में गोली मारकर उन्हें रोका। इसके बाद कार का शीशा तोड़ सौम्या को गोली मारी। पहले यह मामला कार दुर्घटना का लग रहा था लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो सका कि सोम्या दुर्घटना में नहीं मरी बल्कि उसे गोली मारी गई है। २६ वर्षीय सौम्या जेएनयू रेडलाइट से आगे वसंत कुंज इलाके में सुबह के साढे तीन बजे के आसपास अपनी कार में मृत पाई गईं। उनकी कार रोड डिवाइडर से टकराई हुई थी। उनका घर वसंत कुंज में है।
खून में लथपथ सौम्या ड्राइविंग सीट पर आगे की ओर झुकी हुई पड़ी थीं। उनकी मौत मौके पर ही हो चुकी थी। हालांकि उन्हें एम्स लाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। एक गोली उनके सिर के दाएं हिस्से में लगी। कार के एक टायर में भी गोली लगी थी। कार की हालत से साफ था कि रुकने से पहले कंट्रोल से बाहर हो चुकी थी और काफी दूर तक घिसटती चली गई थी।

हत्या की पुष्टि होते हीं पुलिस टीम ने जांच में तेजी लाते हुए हर संभल कोशिश कर रही है कातिल का जल्द से जल्द पता लगाकर दोषियो को सजा दिलायी जाये। कार के अंदर बाल के गुच्छे भी मिले हैं। सोम्या की कार के एक साइ़ड ब्लू रंग का निशान है। हो सकता है जिस कार ने टक्कर मारी है हत्यारा जिस गाड़ी में सवार था उस गाड़ी का निशान हो। फरेंसिक टीम भी इस काम में जुट गई है। सोम्या के मोबाइल की भी जांच की जा रही है कि सोम्या ने किन किन लोगों से बातचीत की।

Friday, 11 July 2008

बेचारी आरूषि

बेचारी आरूषि। अब इस दुनियां में नहीं है। इसकी हत्या कर दी गई बेहरमी से। इसके बाद भी इसकी हत्या को लेकर मजाक बना दिया गया। उत्तर प्रदेश पुलिस कहती है कि आरूषि की हत्या में इसके पिता डा़ राजेश तलवार की भूमिका हो सकती है। उसे गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में इस मामले को सौंप दिया गया सीबीआई को। सीबीआई ने इस मामले में डा. राजेश तलवार को निर्दोष करार देते हुए उसके नौकर हेमराज के दोस्तों राजकुमार, कृष्णा और विजय मंडल को आरोपी बनाया है। इनलोगों पर ये भी आरोप है कि इनलोगों ने आरूषि के साथ साथ अपने दोस्त हेमराज की भी हत्या कर दी। पर कृष्णा की भांजी कह रही हैं कि सीबीआई असली आरोपी को बचा रही है।

आरूषि के पिता के खिलाफ कोई सबूत नहीं - सीबीआई के ज्वाइंट निदेशक अरूण कुमार ने साफ कर दिया है कि आरुषि की हत्या में उसके पिता डॉ. राजेश तलवार का कोई हाथ नहीं है। तलवार दंपती के साइको एनैलिसिस और पॉलीग्राफ टेस्ट के बाद यह निर्णय लिया गया। उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले। सीबीआई के अनुसार हत्या को लेकर जो मामले सामने आये हैं वे निम्नलिखित प्रकार से है। आरूषि की हत्या को लेकर ऊहापोह में रहे सीबीआई ने अपनी जांच की बुनियाद बनाई आरूषि के घर को। उन्होंने परीक्षण किया कि एसी चलने के दौरान यदि आरुषि के कमरे से चिल्लाने की आवाज आये तो उसके पिता डा. राजेश तलवार की कमरे तक आवाज जाती है या नहीं। परीक्षण के दौरान पाया गया कि नहीं।

सीबीआई की नई थ्योरी - शक की सुई कृष्णा की ओर गहरा गई। जिस रात कत्ल हुई थी उसके अगले दिन सुबह डा. राजेश तलवार की पत्नी डा. नूपुर तलवार ने घर के कामकाज करने वाली के आने पर हेमराज के मोबाइल पर फोन किया। फोन उठाने के बाद काट दिया गया। कॉल को ट्रैस करने पर मालूम चला कि फोन आसपास के इलाके में ही किसी के पास है। यानी फोन ऐसे व्यक्ति के पास है जो आरूषि के घर बेधड़क आता जाता हो। और जहां तक हेमराज और आरुषि को एक साथ कमरे में देखने वगैरह की कहानी कृष्णा की बनाई हुई थी।और उसने ही जांचकर्ताओं को गलत दिशा में भेजने की कोशिश की। इसलिए शक की सुई कृष्णा की ओर घूमी। नारको एनैलिसिस टेस्ट में कृष्णा ने हत्या की बात कबूली और उसमें दो और लोगों-राजकुमार और विजय मंडल- के नाम सामने आए। हत्या की रात क्या हुआ (सीबीआई) : राजकुमार ने बताया कि हेमराज के बुलावे पर मैं उसके घर पहुंचा। वहीं पर कृष्णा पहले से था। शराब पिये हुए था। मेरे बाद विजय मंडल पहुंचा। शराब का दौर चला। इसी दौरान आरूषि के बारे में बातचीत हुई। नशे में वे आरुषि के कमरे में पहुंच गए और उसके साथ गलत हरकत करने की कोशिश की। आरुषि के विरोध करने पर उन्होंने उसके माथे पर भारी चीज से हमला किया जिससे वह बेहोश हो गई। इसके बाद ये सभी छत पर आ गए जहां उनका हेमराज से झग़ड़ा हुआ। यह झगड़ा बढ़ गया और इन तीनों ने हेमराज की हत्या कर दी। इसके बाद तीनों वापस आरुषि के कमरे में गए और उसका गला रेत दिया। दरअसल, हेमराज का ब्लड ग्रुप एबी पॉजिटिव और आरुषि का ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव था। छत पर आरुषि के रक्त के अंश कहीं नहीं मिले जबकि हेमराज के रक्त के अंश आरुषि के कमरे में भी पाए गए।
सीबीआई के बातों में क्या दम है ? सीबीआई चाहे जितना भी दावा करे लेकिन उसके पास कोई ठोस सबूत नहीं है। न्यायलय में यह केस कितना टिक पायेगा कहा नहीं जा सकता। कृष्णा की भांजी दावे के साथ कह रही है कि कृष्णा कत्ल वाली रात घर पर था।

Wednesday, 25 June 2008

सांसद सूरजभान को उम्र कैद

अपराधी से नेता बने सांसद सूरजभान सिंह और उसके दो सहयोगी जयराम सिंह और राधे सिंह को बेगूसराय के फास्ट ट्रेक कोर्ट के न्यायाधीश आर पी दूबे ने उम्र कैद की सजा सुनाई है। सूरजभान और इसके लोगो ने 16 जनवरी 1992 को बेगूसराय के एक किसान रामी सिंह की हत्या कर दी थी। बताया जाता है कि जमीन विवाद को लेकर रामाधार सिंह की हत्या हो गई। रामाधार सिंह सूरजभान से जुड़ा हुआ था। रामाधार सिंह की हत्या का बदला लेने की मकसद से सूरभान सिंह ने रामी सिंह को मार गिराया।

रामी सिंह की हत्या में सूरजभान के अलावा पांच लोगो को आरोपी बनाया गया था। तीन को तो सजा हो गई। सुरो सिंह और शंकर सिंह को पुलिस ने एक एनकांउटर में मार गिराया था। बहरहाल बिहार में आंतक फैलाने वाले सूरजभान के खिलाफ पटना उच्च न्यायलय की हिदायत थी इस मामले को 30 जून से पहेल निपटा ले।

सूरजभान सिंह का नाम बिहार अपराध जगत में जाना माना नाम है। हत्या, अपहरण और कई तरह के अपराध के लिये कुख्यात सूरजभान हमेशा अपराध कर कानूनी दांव पेंच और गवारों को डरा धमका कर बचता रहा है लेकिन इस बार वह बच नहीं सका।

लोक जनशक्ति पार्टी के सांसद बनने से पहले सूरजभान अपराध जगत का डॉन था। लोकजनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष राम विलास पासवान के आशिर्वाद से सूरजभान बिहार के बलिया संसदीय सीट से चुनाव जीत कर संसद पहुंचे। जिस समय सूरजभान को टिकट दिया जा रहा था उस समय उनके पार्टा के कई लोगों ने इसका विरोध किया था। लेकिन लोजपा नेता पासवान ने सूरजभान को सिर्फ पार्टी टिकट हीं नहीं दिया बल्कि उसे जिताने के लिए पूरी ताकत लगा दी।

कहा जाता है कि हर राजनीतिक दल ने अपने अपने पार्टियों में अपराधी छवि वाले बाहुबलियों को भर रखा है। उसी से टक्कर लेने के लिए लोजपा नेता ने सूरजभान को पार्टी में शामिल किया गया। और सूरजभान ने लोजपा नेता को यही आश्वासन दिया था कि यदि आपको बाहुबल की जरूरत होगी तो मैं आपके लिये तैयार हूं।

Friday, 30 May 2008

आजीवन कारावास विकास और विशाल को

दिल्ली की एक स्थानीय अदलात ने नितिश कटारा हत्या कांड में विकास यादव और विशाल यादव को आजीवन कारावास और एक लाख साठ हजार रुपये का जुर्माना की सजा सुनाई है। नितिश की हत्या फरवरी 2002 में कर दी गई थी। और इस हत्या का आरोप लगा था विकास और विशाल पर क्योंकि विकास को अपनी बहन भारती यादव और नितिश कटारा की दोस्ती पंसद नहीं थी। सज़ा सुनाए जाने के बाद नितिश कटारा की माँ नीलम कटारा ने कहा वे इस फ़ैसले पर न्यायालय का सम्मान करती हैं। दूसरी ओर डी पी यादव ने कहा कि उनके बेटे और भतीजे को जान बुझ कर फंसाया गया है।
ये मामला इसलिए सुर्खियों में हमेशा रहा क्योंकि विकास उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता डीपी यादव के बेटे हैं और नितीश एक आईएएस अधिकारी के बेटे थे।

बाहुबली नेता डीपी यादव ने कहा कि अपने बेटे और भतीजे के लिए वो इस फ़ैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगे. वहीं नितिश की मां ने कहा कि वे न्याय के लिए लड़ाई जारी रहेगी। इस मामले में कुल 42 गवाह पेश किये गये। नितिश कटारा की मां के अनुरोध पर इस केस की सुनवाई गाजियाबाद से दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया।

बहरहाल पुलिस के अनुसार 16-17 फरवरी, 2002 की रात नितीश कटारा का ग़ाज़ियाबाद से अपहरण किया गया था और फिर उनकी हत्या कर दी गई। नितिश के परिवार वालों का कहना है कि विकास और विशाल ने नितीश कटारा की इसलिए हत्या की थी क्योंकि उन्हें अपनी बहन भारती यादव से उसकी दोस्ती पसंद नहीं थी।

Thursday, 22 May 2008

हीरोइन ने की ब्वॉय फ्रेंड की हत्या, 300 टुकड़े किए अपने दूसरे ब्वॉय फ्रेड के साथ मिलकर

बालाजी टेलिफिल्म के क्रिएटिव हेड नीरज ग्रोवर की बेरहमी से हत्या कर दी गई है। उसके करीब 300 टुकड़े किए गए। ये हत्या किसी दुश्मन ने नहीं बल्कि रात भर उसके साथ रहने वाली उसकी गर्ल फ्रेंड और कन्नड़ फिल्म की हीरोईन मोनिका मारिया ने अपने दूसरे ब्वॉय फ्रेंड लेफ्टिनेंट एम एल मैथ्यू के साथ मिलकर की है। नीरज पिछले 6 साल से मारिया के साथ था और मैथ्यू पिछले तीन साल से। मारिया दोनो के साथ रात में रहा करती थी। नीरज मुंबई में था और मैथ्यू कोच्ची में। नीरज की हत्या के बाद मैथ्यू और मोनिका हमविस्तर हुए। इसके बाद मारिया बाजार से पेट्रोल और चाकू आदि सामान लाने चली गई। इधर मैथ्यू नीरज को टुकड़े करने में लगा रहा।

मैथ्यू 6 मई की रात कोच्ची से मुंबई में मारिया को फोन करता है। बातचीत के दौरान मारिया के घर से किसी लड़के की आवाज सुनाई देती है फोन पर मैथ्यू को। मैथ्यू पूछता है मारिया से, घर में कौन है तुम्हारे साथ। मारिया बताती है नीरज है मुझे शिफ्टिंग में मदद कर रहा है। इस पर मैथ्यू ने कहा कि नीरज रात में नहीं रुकेगा। मारिया ने भी वायदा किया कि वह अपने घर चला जायेगा। पर नीरज अपने घर नहीं गया और रात भर मोनिका और नीरज एक साथ रहे।

मारिया को क्या पता कि उसका दूसरा ब्वाय फ्रेंड सुबह सुबह उसके घर पहुंच जायेगा। हुआ ये कि मैथ्यू नीरज की रात में मारिया के घर मौजूदगी की खबर सुनकर पागल हो गया। उसे विश्वास नहीं हुआ कि नीरज रात में अपने घर चला जायेगा इसलिए मैथ्यू ने देर रात की फ्लाइट पकड़कर मुंबई आ गया और जब मोनिका के घर पहुंचा तो नीरज को पाकर वह पागल हो गया। दोनो के बीच मारपीट हुई। बताया जाता है कि इसी दौरान लेफ्टिनेंट मैथ्यू ने नीरज की हत्या कर दी।

एक तो नीरज की हत्या उसके बाद फिर मोनिका और मैथ्यू का घिनोना खेल शूरू हुआ। मोनिका के सेक्स में पागल हो चुका मैथ्यू ने मोनिका के साथ मिलकर मैथ्यू के टुकड़े टुकड़े कर दिए। चाकू भी खरीद मोनिका ही लेकर आई थी। कुल तीन सौ टुकड़े। उसे दो बैग में रखा गया और मुंबई से लगे थाणें शहरे के मनोर के जंगल में जला दी।

अगले दिन मोनिका नीरज के दोस्त के साथ मिलकर मालाड थाने में नीरज की गुम होने की रिपोर्ट लिखवाती है। लेकिन पुलिस की पुछताछ और लगातार दबाव के कारण आखिर मोनिका अपनी गुनाह कबूल करती है। मोनिका और मैथ्यू दोनो को हीं गिरफ्तार कर लिया गया है।

Tuesday, 25 March 2008

एसीपी राजबीर की हत्या अंडरवर्ल्ड ने की

अंडरवर्ल्ड ने दिल्ली के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस राजबीर सिंह की गोली मार कर हत्या दी। अंडरवर्ल्ड के उभरते डॉन बंटी पांडे ने दावा किया है कि उसी के गिरोह ने राजबीर की हत्या की है। इसका खुलासा खुद बंटी पांडे ने किया है। उसने एक टीवी चैनल को फोन कर बताया कि हत्या उसी ने करवाया है। जिस विजय भारद्वाज को पुलिस ने गिरफ्तार किया है उसने गोली नहीं मारी है। बंटी पांडे ने स्वीकार किया है कि विजय से उसकी दोस्ती थी और वह उसका प्रोपर्टी का काम भी देखता था लेकिन राजबीर ने पैसे को लेकर विजय को इतना जलील किया कि वह आत्महत्या करने वाला था। इसके बाद हीं राजबीर की हत्या की योजना बनाई गई।
इससे पहले की कहानी निम्नलिखित प्रकार से थी।पुलिस के अनुसार योजना के तहत आरोपी विजय ने पैसे के लेन-देन के मामले में एनकाउंटर विशेषज्ञ राजबीर को मिलने के लिए बुलाया । राजबीर पैसों के लिए विजय पर दबाव बना रहा था। मुलाकात के दौरान विजय ने अपने ड्राइवर व नौकर को बाहर भेज दिया था।पुलिस ने कहा कि विजय ने बयान में कहा है कि उसने तीन दिन पहले राजबीर से ही एक प्राइवेट रिवॉल्वर ली थी। इसी 32 बोर की रिवॉल्वर से विजय ने राजबीर पर दो गोलियां चलाई हैं। पुलिस के मुताबिक विजय ने पहली गोली पीछे से चलाई और दूसरी गोली बगल से हालांकि ऐसी भी खबरें हैं कि एक गोली राजबीर के माथे पर भी लगी है।
बहरहाल घटना को देख यही लगता है कि एसीपी राजबीर के पुलिस कर्तव्य के अलावा और भी उल्टे सीधे धंधे थे जिसका शिकार वे हो गये। राजबीर को जेड प्लस की सुरक्षा मिली हुई है। ऐसे में सवाल उठात है कि राजबीर दिल्ली से गुड़गांव बिना सुरक्षा के क्यों गया। राजबीर की हत्या तो हुई हीं साथ ही दिल्ली पुलिस की साख भी दाव पर लग गई।

Thursday, 20 March 2008

पत्रकार शिवानी की हत्यारे को सजा सोमवार को

शिवानी हत्याकांड को लेकर देश में बवंडर मच गया था क्योंकि इस हत्या में सीधे तौर पर एक आईपीएस आधिकारी रविकांत शर्मा का नाम उछला। इतना ही नहीं उस समय और तहलका मचा जब भाजपा के एक बड़े नेता जो अब दिवंगत हो चुके हैं उनका नाम भी सामने आया। ये आरोप रविकांत शर्मा की पत्नी ने दिवंगत भाजपा नेता का नाम लेकर कहा था कि शिवानी की हत्या में उनके पति को फंसाया जा रहा है जबकि हत्या का मुख्य आरोपी को बचाया जा रहा है क्योंकि केन्द्र में उनकी सरकार है। शिवानी की कई लोगों से मधुर संबंध थे उन्हीं में एक शर्मा जी भी थे। कहा जाता है कि प्यार के चक्कर में ये अधिकारी कुछ ऐसे दस्तावेज शिवानी को सौंप दिये जो उनके करियर को तबाह करता। उस दस्तावेज के आधार पर शिवानी उसे अपने साथ शादी करने के लिये दबाव बनाती रही और परेशान होकर शर्माजी ने उसकी हत्या करा दी।

बहरहाल इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार शिवानी भटनागर हत्याकांड ,में अदालत द्वारा कसूरवार ठहराए गए चार आरोपियों को सजा अब होली के बाद सोमवार को सुनाया जायेगा। दिल्ली की कडक़ड़डुमा कोर्ट ने 18 मार्च को मामले के मुख्य आरोपी रविकांत शर्मा (प्रधानमंत्री कार्यालय में ओएसडी रह चुके हरियाणा कैडर के आईपीएस अफसर) प्रदीप शर्मा , श्रीभगवान और सत्यप्रकाश को दोषी ठहराया। शिवानी भटनागर की 23 जनवरी 1999 को पटपड़गंज के नवकुंज अपार्टमेंट स्थित उनके फ्लैट में हत्या कर दी गई थी। जिस वक्त उनकी हत्या हुई वह घर पर अकेली थीं।

एक नजर घटनाक्रम पर - 30 जुलाई 2002: अभियुक्त श्रीभगवान गिरफ्तार , 2 अगस्त: प्रदीप शर्मा, 17 अगस्त: सत्यप्रकाश गिरफ्तार और 30 सितंबर: वेदप्रकाश गिरफ्तार । 27 अगस्त: आईपीएस अफसर रविकांत शर्मा का हरियाणा के अंबाला कोर्ट में सरेंडर, पुलिस उसे लेकर दिल्ली पहुंची । 28 सितंबर: क्राइम ब्रांच ने शर्मा को औपचारिक तौर पर गिरफ्तार किया । 25 अक्टूबर 2002: चार्जशीट दाखिल । 3 मार्च 2003: सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय, 20 मार्च 2003: पहला गवाह के बयान दर्ज और 23 अगस्त 2006: आखिरी गवाह के बयान दर्ज हुये। अगस्त 2007 में सरकारी पक्ष की बहस और नवंबर 2007 में बचाव पक्ष की बहस शुरू । 4 - 5 मार्च 2008: सरकारी पक्ष ने सफाई पेश की । 18 मार्च - मुख्य आरोपी सस्पेंड आईपीएस अफसर रविकांत शर्मा , प्रदीप शर्मा , श्रीभगवान और सत्यप्रकाश को दोषी ठहराया गया।
आईपीएस अधिकारी के वकील कह चुके हैं कि वे जिला अदालत के फेसले के खिलाफ हाई कोर्ट जायेंगे।

Tuesday, 18 December 2007

प्रवीण महाजन को उम्र कैद की सजा

बीजेपी नेता प्रमोद महाजन की हत्या के जुर्म में मुंबई सेशंस कोर्ट ने उन्ही के भाई प्रवीण महाजन को उम्रकैद की सजा और कुल 20 हजार की जुर्माना सुनाई है। अदालत ने कल ही उन्हें इस मामले में दोषी घोषित किया था। सजा सुनाये जाने से पहले बचाव पक्ष और मुंबई पुलिस के वकीलों के बीच कडी बहस हुई। प्रवीण महाजन को जब सेशंस कोर्ट के जज श्रीहरि डावरे ने जब उम्रकैद की सजा सुनाई तो उनके चेहरे पर न तो कोई दुख था और न ही कोई घबराहट। मानो इस सजा के लिये वे पहले से ही तैयार थे। सोमवार को ही अदालत ने उन्हें बीजेपी नेता प्रमोद महाजन की हत्या का दोषी करार दिया था। सजा सुनाये जाते वक्त अदालत में खचाखच भीड थी। पत्रकारों, पुलिसकर्मियों के अलावा अदालत में प्रवीण महाजन की पत्नी सारंगी भी मौजूद थीं। प्रवीण को उम्रकैद की सजा सुनाये जाते ही वो रोने लगीं। वहां आये प्रवीण के बाकी रिश्तेदारों ने उन्हें संभाला। प्रवीण महाजन को धारा 302 और धारा 449 के तहत उम्र कैद और कुल 20,000 का जुर्माना सुनाया गया है। अदालती कार्रवाई की शुरूवात मुंबई पुलिस के वकील उज्जवल निकम और बचाव पक्ष के वकीलों के बीच गर्मागर्म बहस से हुई। मुंबई पुलिस ने अदालत से कहा कि प्रवीण महाजन ने जो अपराध किया है, उसके लिये फांसीं से कम सजा नहीं दी जा सकती। प्रमोद महाजन एक बडे कद के नेता थे और प्रवीण ने सुनियोजित ढंग से उनकी हत्या की। ये बात अदालत में साबित हो चुकी है, इसलिये सजा सुनाये जाते वक्त कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिये।
अदालत में ये बात साबित हो चुकी है कि 22 अप्रैल 2006 को प्रवीण महाजन ने अपने भाई प्रमोद के वर्ली इलाके के फ्लैट में जाकर उनपर गोलियां बरसाईं। इसके बाद उसने खुद को वर्ली पुलिस थाने में सरेंडर कर दिया। 13 दिनों तक मौत से जूझने के बाद आखिरकार प्रमोद महाजन ने दम तोड दिया। इस मामले में मुंबई पुलिस ने मुकदमें के दौरान कुल 34 गवाहों को अदालत के सामने पेश किया, जिसमें प्रमोद महाजन की पत्नी रेखा और नौकर महेश वानखेड़े भी शामिल थे, ये दोनों लोग वारदात के वक्त प्रमोद महाजन के फ्लैट में मौजूद थे, इन दोनों गवाहों के साथ ही उस इंसपेक्टर ने भी गवाही दी जिसके सामने प्रवीण ने खुद को सरेंडर किया था। हालांकि पुलिस का केस काफी मजबूत था लेकिन बचाव पक्ष ने भी इस बात की पूरी कोशिश की, कि प्रवीण महाजन को फांसीं की सजा न मिले। सजा में नरमी बरतने की मांग करते हुए बचाव पक्ष के वकील ने जज से कहा कि प्रवीण के 3 आश्रित हैं। पत्नी सारंगी के अलावा उनके 2 बच्चे हैं। प्रवीण ही अपने परिवार के लिये रोजी रोटी जुटाने का आधार हैं। उनका कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है। इसलिये उन्हें फांसीं न दी जाये। अदालत ने प्रवीण महाजन को Indian Penal Code की धारा 302 और 449 के तहत दोषी करार दिया है। इसका मतलब है कि अदालत ने ये माना कि प्रवीण 22 अप्रैल की सुबह प्रमोद महाजन की हत्या के इरादे से ही उनके घर में घुसे थे। धारा 302 के तहत अधिकतम सजा फांसीं की है और धारा 449 के तहत 10 साल कैद-ए-बामशक्कत।
प्रवीण महाजन को फांसीं की सजा दिये जाने की मांग पर अदालत के सामने ये सवाल खडा हुआ कि क्या उसका किया हुआ जुर्म rarest of rare crime के दर्जे में आता है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले आदेशों में इस बात पर जोर दिया है कि फांसीं की सजा उन्ही गुनहगारों को दी जानी चाहिये, जिन्होने इतने गंभीर अपराध किये हों, जो आम तौर पर नहीं होते। प्रवीण महाजन के मामले में भी अदालत को ये देखना था कि क्या उनका जुर्म rarest of rare crime की परिभाषा के दायरे में आता है। कोर्ट ने कहा नहीं ये मामला rarest of rare crime की परिभाषा के दायरे में नहीं आता है।
प्रवीण महाजन ये कानूनी लडाई हार चुके हैं, लेकिन सेशंस कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ वे बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं। आर्डर की कॉपी हाथ लगते ही उनके वकील हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

Wednesday, 3 October 2007

डीएम हत्याकांड मामले में पूर्व सांसद को फांसी

अरुण नारायण
पटना के सत्र न्यायालय ने गोपालगंज के ज़िलाधिकारी जी कृष्णैया की हत्या के मामले में पूर्व सांसद आनंद मोहन, अखलाख अहमद और अरुण कुमार को फाँसी की सज़ा सुनाई है. इनके अलावा अदालत ने विधायक मुन्ना शुक्ला, आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद, हरेंद्र कुमार और शशि शेखर को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई है। इन लोगों पर भीड़ को उकसाने का आरोप है। भीड़ ने जिलाधिकारी कृष्णैया की पीट पीट कर हत्या कर दी थी। जब इन नेताओं को सजा सुनाई जा रही थी उस समय अदालत के बाहर इनके समर्थकों का भारी जमावडा था। हो हंगामे की आंशका थी लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। अदालत के फैसले पर कुछ लोगों का कहना था कि इतनी कड़ी सजा नहीं दी जानी चाहिये थी। कुछ लोगों का कहना था कि अदालत ने एकदम सही फैसला सुनाया है। एक ने कहा कि आप इसी से अनुमान लगा सकते है कि जब एक डीएम की हत्या हो सकती है तो आमलोगों की गिनती ही नहीं है। अदालत के बाहर मौजूद लोगों में से एक व्यवसायी ने कहा कि पटना के सत्र न्यायाधीश रामश्रेष्ठ राय ने सटीक कदम उठाया। यह एक ऐसा मोड़ है जहां से अपऱाध कमी आयेगी। लोग अपराध करने से पहले 10 बार सोचेगें। इसका सबसे बडा उदाहरण है फैसले सुनाने के बाद दोषी करार दिये गये लोगों के समर्थकों का शांत रहना। ये वही लोग है जो एस पी जैसे अधिकारियों पर भी सरे आम हाथ छोड़ दिया करते है। बहरहाल,विधायक मुन्ना शुक्ला के वकील सुनील कुमार ने कहा है कि जल्दी ही इस फ़ैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की जाएगी। जिलाधिकारी कृष्णैया की हत्या 4 दिसंबर 1994 को मुज़फ्फ़रपुर ज़िले के खबरा गाँव के पास उग्र भीड़ ने कर दी थी.ये लोग बाहुबली और स्थानीय नेता छोटन शुक्ला की हत्या के विरोध में जुलूस निकाल रहे थे.मुन्ना शुक्ला छोटन शुक्ला का भाई है।

Monday, 1 October 2007

पूर्व सांसद और विधायक जिलाधिकारी हत्याकांड में दोषी

बिहार - बाहुबली और पूर्व सांसद आंनद मोहन, उनकी पत्नी लवली आंनद, विधायक विजय कुमार शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला, पूर्व विधायक अखलाक अहमद , शशि शेखर और अरुण कुमार सिन्हा को गोपालगंज की स्थानीय अदालत ने गोपालगंज के जिलाधिकारी जी कृष्णैया की हत्या के मामले में दोषी करार दिया है। इनलोगों पर जिलाधिकारी कृष्णैया को जान से मारने के लिये भीड़ को उकसाने का आरोप है। यह हत्या 5 दिसंबर 1994 को उस समय हुई थी जब छोटन शुक्ला की शव यात्रा के दौरान भीड़ जिलाधिकारी कृष्णैया की पीट पीट कर हत्या कर दी थी। सजा 3 अक्टूबर को सुनाई जायेगी। आंनद मोहन उस समय बिहार पीपुल्स पार्टी के नेता थे अब यह पार्टी अस्तिव में नहीं है। मुन्ना शुक्ला जनता दल यू से विधायक हैं।

Sunday, 30 September 2007

हत्या हो सकती थी उप मुख्यमंत्री की

धनबाद से कुंदन सिंह
झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता और झारखंड के उप मुख्यमंत्री सुधीर महतो के काफिले पर हमले की नाकाम कोशिश की गई।श्री महतो विनोबा भावे विश्वविधालय में आयोजित एक युवा महोत्सव में भाग लेकर धनबाद से जमशेदपुर लौट रहे थे। रास्ते में पश्चिम बंगाल में पुरुलिया और बलरामपुर के बीच जैसे ही सुधीर महतो की गाड़ी पहुंची उनकी गाड़ी पंक्चर हो गई। ये पंक्चर एक प्लान के तहत बिछाई गई कील से हुई। यह मामला रात के साढे ग्यारह बजे के आसपास की है। खतरे को भांपते हुये सुरक्षा बलों ने अपराधियों से मुकबला करने के लिये पोजिशन ले ली। तब जाकर वे लोग भाग खड़े हुये जो लोग किसी घटना को अंजाम देने की मकसद से रास्ते में कीलें बिछाई थीं। अनुमान के आधार पर कहा जा रहा है कि सड़क लुटेरा गिरोह के सदस्यों ने लूट की घटना को अंजाम देने की कोशिश के तहत सड़क पर कीलें बिछाई होंगी। चर्चा यह भी है कि यह योजना सुधीर महतो की हत्या की साजिश के तहत किया गया था लेकिन इस बात के अभी तक कोई ठोस प्रमाण नहीं मिलें है। उल्लेखनीय है कि इसी साल 4 मार्च को झामुमो नेता और सासद सुनिल महतो की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी । इस लिये इस घटना की जांच पुलिस हर तरह से कर रही है। बहरहाल रात में हीं श्री महतो को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जमशेदपुर पहुंचा दिया गया।

Sunday, 16 September 2007

पुलिस की मौजूदगी में वकील की हत्या

झारखंड के जमशेदपुर में अरविंद गुहा ने अपने ही वकील सुधान चटर्जी की हत्या कर दी। यह हत्या उसने पुलिस की मौजूदगी में की और इसमें अरविंद गुहा की पत्नी ने भी अपने पति का साथ दिया। हत्या का आरोपी अरविंद गुहा का कहना है कि संपति विवाद को लेकर उसका और उसके भाई के बीच विवाद चल रहा था और यह मामला न्यायलय में है। लेकिन मेरा वकील सुधान चटर्जी ने मुझसे गदारी कर मेरे भाई से साठगांठ कर लिया और मुझे न्यायलय में हरवा दिया।
इस घटना के बारे में कहा जा रहा है कि वकील सुधान को अरविंद पिछले एक माह से ज्यादा समय तक बंधक बना कर रखा तो इतने दिनों तक पुलिस क्या कर रही थी? ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि यदि वकील ने अपने क्लाइंट के साथ धोखा किया तो क्या यह उचित है? बहरहाल हत्या को किसी भी तरह सही नहीं कहा जा सकता। यदि सुधन को कोई शिकायत थी अपने वकील से, तो उसके खिलाफ न्यायलय में शिकायत की जा सकती थी। न्यायलय में इसके लिये भी व्यवस्था है।सही पाये जाने पर सुधान के खिलाफ न्यायलय ज़रुर कार्रवाई करती। लोगों के साथ न्याय हो इसके लिये ज़रुरी है कि वकील, पुलिस और प्रशासन सभी को न्याय संगत काम करना होगा अन्यथा इस तरह के अपराध को रोक पाना काफी मुश्किल होगा।

Thursday, 13 September 2007

10 लोगों की निर्मम हत्या

बिहार राज्य के वैशाली ज़िले में ग्रामीणों ने 10 लोगों को पीट-पीटकर मार डाला। मारे गये लोगों के बारे में ग्रामिणों का कहना है कि ये लोग चोरी करने गाँव पहुँचे थे. इस मामले में पुलिस ने दो केस दर्ज किये। पहला ग्रामीणों की ओर से चोरी करने का और दूसरा केस अज्ञात लोगों के खिलाफ कथित चोरों की हत्या का। इस बारे में वहां की पुलिस अधिकारियों कहना है कि अपने जान माल की रक्षा करना गांव वालों का अधिकार है लेकिन हिंसक कार्रवाई करना गैर कानूनी है । बताया जा रहा है कि कुल 11 लोग चोरी करने पहुंचे जिसमें से 10 लोगो को मार डाला गया, एक की हालत खराब है। इस घटना पर गांव वालों का कहना है कि इलाके में चोरी की घटनायें बढ गई थीं। पुलिस कुछ नहीं कर पा रही थी। इस लिये गांव वालों ने कठोर कदम उठाये। ऐसे में सवाल यह उठता है कि गावों में लगातार चोरी की शिकायत के बाद पुलिस ने चोरी रोकने के लिये ठोस कदम क्यों नहीं उठायी ? बहरहाल घटना के पांच घंटे बाद पहुंची पुलिस। और इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।