Friday 2 May 2008

दाउद करवा सकता है अरुण गवली की हत्या पुलिस कस्टडी में

अंडरवर्ल्ड डॉन से विधायक बने अरूण गवली की हत्या पुलिस कस्टडी में भी हो सकती है। क्योंकि उसका जानी दुश्मन है अपराध दुनिया का बेताज बादशाह और अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहीम। ऐसा मानना है मुंबई पुलिस का। इसलिए मकोका के तहत गिरफ्तार अरूण गवली को जो भी खाना दिया जाता है उसकी जांच होती है। चाहे वह भोजन उसके घर से हीं क्यों न आया हो। जांच का एक हिस्सा यह भी है कि डॉन-विधायक के लिए जो भोजन लेकर आता है पहले उसे हीं खिलाया जाता है और दो घंटे तक इतंजार किया जाता है। जब यह तय हो जाता है कि भोजन में कुछ नहीं था तब जाकर अरूण गवली को भोजन दिया जाता है।
जब मुंबई में गैंगवार अपने चरम पर था तब दाउद इब्राहीम ने अरूण गवली के भाई पापा गवली को मरवा दिया था। इसके जवाब में गवली ने दाउद की बहन हसिना पारकर के पति इब्राहिम पारकर की हत्या करवा दी थी। इसके बाद से दोनो के बीच लगातार गैंगवार होता रहा। इब्राहीम पारकर की हत्या के आरोप में पुलिस ने अरुण गवली के खास शूटर नीलेश हरदनकर और सचिन डेरे को गिरफ्तार किया था और दाउद किसी भी कीमत पर इन दोनो शुटरों को उड़ाना चाहता था।
इसके लिए तैयारियां की जाने लगी। दाउद ने नीलेश और सचिन की हत्या की जिम्मेवारी अपने खास शूटर सुभाष ठाकुर को सौंपी। सुभाष इसकी तैयारी करने लगा। तैयारी के बीच हीं दाउद को मालुम चला की नीलेश और सचिन को जे जे हॉस्पीटल में दाखिल कराया गया है। फिर क्या था दोनो को वही ढेर करने की योजना को अमली जामा पहनाने का फैसला कर लिया गया। सुभाष ठाकुर के साथ कई लोग जुडे जिसमें ब्रजेश सिंह भी था जिसे कुछ महीने पहले हीं गिरफ्तार किया गया है।
जे जे हॉस्पीटल में हमला किया गया। पहली बार आधुनिकतम हथियार ए के 47 का इस्तेमाल किया गया। इस हमले दो पुलिस वालों और एक हत्या का आरोपी शूटर हरदनकर मारा गया। पुलिस ने काफी बहादुरी दिखाई लेकिन ए के 47 के सामने वे कर भी क्या सकते थे। इस गोलीबारी के बाद अंडरवर्ल्ड की दुनिया में दाउद का सिक्का इतना मजबूत हुआ कि उसने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा।
बहरहाल, दाउद से अलग हुए अरुण गवली, छोटा राजन और अबू सलेम को हमेशा ही दाउद से खतरा बना हुआ है। इनमें से अबू सलेम जेल में है। बताया जाता है कि पुर्तगाल में अबू सलेम की गिरफ्तारी में डी कंपनी का ही हाथ था। बैंकाक में छोटा राजन पर भी जबरदस्त हमला हो चुका है। अरूण गवली एक बार फिर पुलिस के हथे चढ गया है। कहा जा रहा है कि दाउद गवली को उड़ाने के लिए कुछ भी कर सकता है। अरुण गवली मकोका की धाराओं में मुंबई के पुलिस मुख्यालय के लॉकअप में बंद हैं।

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